सबद
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सबद फिल्‍म : प्रेम के सुनसान में




ऋत्विक घटक ने अपनी डायरी में लिखकर इस इबारत को मशहूर कर दिया था कि फिल्‍में उस दिन और अच्‍छी और विविध बनने लगेंगी, जब उन्‍हें बनाना काग़ज़ पर लिख देने जितना आसान होगा. ख़ैर. यह तकनीकी काम है, तमाम उपकरण लगते हैं, इसलिए ऐसा आदर्शवादी यथार्थ तो कभी उपलब्‍ध होने से रहा, लेकिन घटक के वाक्‍य के मर्म को एक रूपक की तरह समझा जाए.  बिना संसाधनों और तकनीकी-व्‍यावसायिक सुविधाओं के, जब आज यह फिल्‍म बनकर तैयार होने के बाद दिखाई जा रही है, तब उस घटक के उस यक़ीन की पुख़्तगी बढ़ जाती है. 

आकार के लिहाज़ से यह एक छोटी-सी फिल्‍म है, लेकिन असर विशाल है. सबद की नई प्रस्‍तुति इस फिल्‍म 'प्रेम के सुनसान में' को बनाने में अनुराग वत्‍स और कुमार अव्यय ने ख़ासा श्रम किया है. साहित्‍य और सिनेमा का संबंध तो ख़ूब ज़ाहिर है, लेकिन यह कथात्‍मक साहित्‍य नहीं, कथात्‍मक सिनेमा नहीं, यहां साहित्‍य और सिनेमा, दृश्‍य और ध्‍वनि, आकार और असर, इन सबमें मौजूद काव्‍यतत्‍व प्रधान है. 

आज निर्मल वर्मा का जन्‍मदिन है. वह हमारी भाषा में हुए प्रेम के अद्भुत चितेरे थे. प्रेम की सूक्ष्‍मतर अनुभूतियों पर बनी इस फिल्‍म को आज-दिवस निर्मल वर्मा की स्‍मृतियों के प्रति एक अनुपम भेंट की तरह प्रस्‍तुत किया जा रहा है. इस फिल्‍म में लिखे सारे शब्‍द अनुराग वत्‍स के हैं, आवाज़ उनकी है, छवियां कुमार अव्यय ने अपने कैमरे से बुनी हैं, निर्मल वर्मा इसके किसी दृश्‍य में नहीं हैं, वह अनुपस्थित हैं, लेकिन फिर भी उपस्थि‍त हैं. इसीलिए यह उनकी अनुपस्थित उपस्थिति को समर्पित है. प्रेम अपने आप में एक अनुपस्थित उपस्थिति है. उसके न होने में उसके होने के सारे प्रमाण हैं. हर सुनसान, विशाल आबादी का एक सुझाव है. 

यह फिल्‍म हिंदी साहित्‍य व सिनेमा के संबंध को नये थल्‍ले पर ले जाती है. सबद फिल्‍म्‍स की कड़ी यह दूसरी प्रस्‍तुति है. इससे पहले सबद पोएट्री फिल्‍म का प्रदर्शन हो चुका है. उसे आप इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं. भविष्‍य में भी सबद ऐसे प्रयोग व अध्‍यवसाय करता रहेगा
 -- गीत चतुर्वेदी 







 
84 comments:

निराश हुआ.


शुक्रिया दोस्त!


दृश्य अच्छे हैं... पढ़ना विचलित कर देता है... प्रभावशाली नहीं है...


अच्छी लगी .. बढ़िया दृश्य परिकल्पना .. बढ़िया स्क्रिप्ट .. इवेन सिगरेट के एक शॉट में साफ साफ़ दिखे अनुराग भी किरदार-से ही लगे ..पलकें झपकाना ... बैकग्राउंड स्कोर सूदिंग है .. अवयय का कैमरा एक समानांतर स्क्रिप्ट खुद लेकर चलता है .. रौशनी में अँधेरे को खूबसूरती से पकड़ लेता है

एक कमी लगी .. बड़ी कमी .. वोइस ओवर की .. शायद मैं आवाज़ किसी प्रोफेशनल की सुनना ज्यादा पसंद करता .. शायद वोइस ओवर फिर कराई जा सकती हो .. आवाज़ का स्केल भी बिगड़ा हुआ है ..

शुक्रिया सबद !


visuals are too good. the video moves us in a different world. only one word for this part "beautiful". you have written well Anurag. but, i am disappointed with the voice. you are trapped in the aura of your favorite poet and originality is somehow missing. rise out of it, expressions are limitless, you just need to catch a different angle.


Great! Mujhe Nirmal verma aur wong kar wai dono yaad aa gaye!


waah .....बेहद सुन्दर ...ख्याल जो वजूद था .... नजर आया .............दुआ तुम्हारे लिए दोस्त


Poignant account. The colors, light, music and preps used in the movie are apt. ! Nice.


शुभकामनायें मित्र..


superb..............nic film


बहुत कुछ बहुत सुंदर है...कुछ बेहतर हो सकता था...लेकिन बेहतर हो सकना भी तो अच्छा होता है...


Nice effort.....scenes are effective.
smoky,sad,sound throws in the darkness of lonliness really.GOOD JOB


Excellent work!!!...really like d words, cinematography n music. It seems to me that ur voice needed to be more expressive .....but it was beautiful all the way.....congrats!!!


ek abhinav prayog...aur powerful bhi...


badhai ....saahitya aur cinema men aise sunder prayog hote rahne chaahiyen


ab kya kaha jaye, rahate to hanth milaya jata.:)sundar!


Fantabulous.... Tres bien...C'est magnifience...Good Work..Keep it up.. Proud of You..


प्रेम के सुनसान में उदासी बहुत ज्यादा है, थोड़ी सी Energy और होनी चाहिये थी।
लेकिन सराहनीय प्रयास।
अब इस सुनसान से बाहर आकर भी रचते रहियेगा।
फिलहाल बधाई।


liked the film .. Scent of green papaya bhi dikh gayi :)


निर्मल वर्मा के जन्मदिन पर उनकी उनुपस्थित प्रेम पर लिखी पंक्तियों को अनुराग वत्स की आवाज में सुनना अनूठा अनुभव है. गीत ने फिल्म का परिचय बहुत मन से लिखा है. साहित्य को दृश्य- श्रव्य माध्यमों से जितना जोड़ा जायेगा, उतना ही उसका प्रसार होगा. मेरी शुभकामना है कि इस तरह की फ़िल्में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें.


Bahut Acchi hai,Thodi si editing aur voice changeover must need....


well...done....starting is very nice ...but in the mid when u told about rain..there point your story suddenly turn....ur effort is gr8.."God helps those who help themselves".....dont worry u will catch ur love very soon....
arjan singh gabri


Sunder - Sarhaaniy paryas ..
Flim ko dekhte hue bahut se ahsas ikkatte hone lagte hai aur bahut kuch kahne ko jee chahta hai ...lakin flim ka asar aisa hai ki akhir me khamosh reh jana hi behtar lagta hai .... Behad sunder film ... Aap sabhi ko is paryas ki bahut saari badhaiyan


:

इस पर सुशोभित सक्तावत की प्रतिक्रिया, नजरिए का इंतजार है...


beautiful Anurag Vats............muje ise dekhte huye kisi bade naam ki yaad nahi aayi.............prem ek jaisa hokar bhi sabka apna apna niz ya nizi hota hai, ek maulik khoobsoorat ehsaas k saath, waisi hi hai ye film.......nizi or khoobsoorat.... Kumar Avyaya wong kar wai ki filmon mein aise shots k aankhen ghadda kar dekha hai.......khushi is baat ki hai k is film k laghbhag sabhi shots dekhte huye aankhen jhapkna bhool jaati hain, paani behna, parchaayiaan, rikshe wala shot or anuraag waale sbhi shots kamaal hain...........film ek sapne ki tarha lagi hai.....jiski kalpna pehle ki gayi ho or jise dekha baad mein gaya ho......dono ko badhaai.....


Cinema is born with a dichotomy, which makes it most interesting... The synchronization of technology & aesthetics are at it's peak in this short movie for which I loved it. My personal favorite scene is the tap un with Kafka lines.. Hats off to Sabad team.


heart touching script, technical improvement is possible in sound n effects, awesome cinematography, best possible play with lights n shadows... i watched it four times.. once throughly, second time only sounds, third time only visuals n fourth time again completely.... a really very good effort of reflecting the echo of love and emotions.

P.S. really a great effort of putting up poetic movie.


शानदार कृति। संगीत, दृश्य- रचना एवं पाठ के स्तर पर अच्छी बन पड़ी है. पुनः देखने-सुनने का मन है। बधाई हो आपको।


The film generated very soothing yet restlessness..... it is not zero budget as budgeting is not just mere economics or paisa it is also the years of human mind and creativity, suffering, thru words music images and much more
which is priceless .................. keep on following your passion and drive and rest as we say is history. I hope that you will also give voice to some of the amazing women writers and poets like Amrita Pritam, Sylvia ..... its a long list ...


बेहद सुंदर


निश्चित रूप से सुंदर प्रयोग। शुभकामनाएँ अनुराग को .


शीर्षक के अनुरूप ही शुरुआत ..वाह बेहद खूबसूरत !
और हर एक दृश्य काबिल ए तारीफ़ ..... अपनी छाप छोड़ता हुआ ... आपकी आवाज़ हर्फ़ दर हर्फ़ कहीं गहरे बैठती हुई .. बेहतरीन .. एक कामयाब फिल्म के लिए बहुत बहुत बधाई अनुराग जी .. !!


It's intense. It touched. Visuals are influensive, your words carry the spirit of love and melancholy, voice over could be modulated a little. Thanks for making me go through this.


gud work anurag sir... keep going


सुंदर प्रयोग ...


बहुत अच्छी लगी, बेहद सुन्दर दृश्य, हर दृश्य अपने में एक अलग दर्शन को समेटे हुए, शब्द अच्छे हैं, दिल को छूने वाले, मुझे आवाज़ भी अच्छी लगी, इसका ठहराव और बैठापन मुझे उसी सुनसान में ले गया। पर यदि आवाज़ का स्केल थोडा नीचे होता तो शब्दों की स्पष्टता ज्यादा अच्छी हो सकती थीं। बहुत अच्छा प्रयास.


अच्छी कोशिश. मेहनत की गई है, जो आस जगाती है कि अगली फिल्म और भी बेहतरीन होगी. गीत का संजोया पोस्टर तो कमाल है. कुमार अव्यय,गीत,अनुराग-- सभी को बधाई और अगली फिल्म का अभी से इंतज़ार.


Lovely assembling of thoughts, words n picturisation.


Nice effort.. nice words.. effective assembling of shots.. fantastic background score... the voice suited the theme of loneliness but it could have been better.. voice was effective but could not stir to the point of fully absorbing the listener..was expecting the voice to be more effective.. but overall fantastic work... kudos!!


Best part of the film was music.सबसे अखरने वाली चीज़ थी प्रेम के सुनसान में कॉपीराइट की बात. प्रेम की यह नाजुकी ,नाजुकी का महीन बयान. बयान की वो मार्मिकता कॉपीराइटेड है..बिकती है ..निश्चय ही बेहतरीन फिल्म है ये ..निर्मल के मिजाज को एकदम से पकड़ा है फिल्म ने .पाकीजा कोमल भावनाओं का पवित्र धुंध .एक दुनिया जिसमे सदा को बस जाने को जी चाहे. अनुराग के आवाज़ की खुनकी ,उसकी करूण तरलता टीस से दिल भर देती है तभी कॉपीराइट की सुचना मनो तिलिस्म टूटता है..धक्का सा लगता है दिल को ..पवित्र से पवित्र अनुभव बिकने के लिए होता सुन्दर शब्दो में लिखा जाकर आखिर ...गहरे अवसाद से भरने वाली फिल्म ..


great words, good cinematography and i really like the voice over. Kudos anurag bhai, looking forward for another sabad film :)


Life with love and loneliness...one of the great example...emptiness in life ...best message of creation and creativity...I think a lot of possibility to improve in this film but message is unique....thanks for this!


anurag ,pahle ek achhi koshish ke liye badhai sweekaro ..kuchh bahut thodi kamiyon ke baawzud mujhe film achhi lagi ..apki voice,music,drashy sabka tal mel achha .. kumar avyay ji ka kaam kaabiletareef hai


अनुराग जी ,
सर्वप्रथम आपके लघु काव्य डाक्युमेंट्री की दर्शक दीर्घा में मुफ्त आमंत्रण के लिए आपका आभार ! आपकी साहित्यिक सेवा के इस विकास करम के लिए आप निश्चय ही बधाई के पात्र है ! मेरे लिए साहित्य में किसी तरह का योगदान-योगकरम बहुमूल्य है !
आपके ब्लाग पर एक पाठक का वक्तव्य "निराशा हुई", संभवत: पाठक की अपनी ही पूर्वनिर्धारित आत्मनिंदा हो, क्योंकि जब निराशवादी अभिव्यक्ति अपने मूल्यों में लघुतर हो तो,उसके उद्देश्यों पर संदेह करना लाजिमी है !
दुसरे ही पल यदि,हम इसे दुसरे पहलु के रूप ले तो ज्ञात होता है की ,ये आप ही तो है जिसने उसके चिंतन को अपने प्रयासों से इतना समृद्ध कर दिया की वो आज आपकी ही सघन आलोचना कर सके !
इन बातों में आपके काव्य डाक्युमेंट्री की सफलता,असफलता का उत्तर निहित है !
जहां तक मेरा प्रशन है मे इतना ही कहूँगा मित्र -
"त्रुटियाँ संभावना है और पूर्णता समापन,
यही मेरी समालोचना है !
“महाभूत चन्दन राय”


मुझे बहुत अच्छी लगी,बहुत ही उम्दा पेशकश


Encouraging experiment. Hope to see more from you and your friends.


bohot achhi koshish hai Anurag, tumhain aur Geet Chaturvedi ko mubarakbad! magar ye tau ibtida e ishq hai .. bhavishay main bohot kuchh ki ummmeed bandh gayi hai


एक 'उम्दा फिल्म' के तईं 'स्नेह-युक्त' बधाई।


Keep it up......Congratz...


भाई अनुराग जी आपने एक बेहतरीन फिल्म बनाई है ,देखकर बहुत ही अच्छा लगा .........आपका कमरा और आपकी खुमारी से भरी सूफ़ीयाना आवाज़ background म्यूजिक,संवाद आदि में एक बेहतरीन फ़िल्म बनी है....इसके लिए कोटिशः बधाई स्वीकार करें.....मैं इस फ़िल्म को स्कूली बच्चों में दिखाना चाहूँगा.....कई अपने मित्रों से भी इस फ़िल्म को देखने का आग्रह किया है ....पुनः बधाई


अच्छी लगी...!


Excellent endeavour. Very nice photography, background music perfectly matched the mood of the narration. One thing that I felt was pictures/scenes change with jerk/cut, whereas it should overlap more smoothly. Anurag ji, Geet ji and others involved.............Kudos.....nice job indeed. Best wishes


Awesome topic and photography!!Very powerful words which leave deep impact on our psyche !!Well done!!


bahut sundar...drishya aur shabd behad sundar hai...piche chalti dhun bahut mail khati hai drishyon ke anusaar..


Good one Anurag. Loved the spirit...keep it up...


thanks 4 share...
Behad to nhi fir b prabhavshali aur sundar abhivyakti


good attempt,nice work, best wishes for future.


काश, ऐसी फिल्म मैं बना पाता। मित्र आपकी फ़िल्म फिर से पुराने कमरे में ले आई है हमें । भूलने नहीं देगी।


bahut acchi movi...art film ki jhalak.


बिंदु की बात करते हुए नल से पानी की अनियमित धारा...बिछड़ने के शब्दों पर सूखे पत्तो पर झाड़ू का लगना, लैंप की रौशनी में धुवें का विसुअल...वाकई बेहतरीन फिल्म। अनुराग वत्स और बेहद सटीक धुन देनेवाले अबेल को ढेरों बधाइयाँ।


adbhut prayas!!!!!!!!! kuchh aur log aisi film banayen / kuchh aur asi filmen banen. Vats aapka prayas dhanya hai. jai ho.


Aaise director aur bhi aane chahiye .......& badhai ho anurag ji


badhai behad bhaavuk kar dene wali ..dil dimaag par chaa jane wali


बधाई अनुराग जी को....


it wae awesome........
loved it..
loved everything dialogues,voice screenplay n everything


अतीत और यादों में लिपटे 6 मिनट 17 सेकण्ड, उम्दा...


Sucheta Chatterjee

I appreciate the haunting quality of regret that lingers all through the film like the wisps of smoke from your cigarette. Recognised the lonely path leading to your home. I loved the way ordinary objects were imbued with a sort of poignant beauty.


बारिश इतना करती है कि सब एक छत के नीचे खड़े हो जाएं..



फ़िल्म चौथे मिनट के ग्यारहवें सेकंड पर नल से पानी टपकता है और छत्तीसवें सेकंड तक टपकते ही जाना
काफ़्का को 'कोट' करते हुए...बहुत उम्दा.


"कोशिश करके भूलना बेतरह याद की निशानी है".....और कुछ चीज़ें जेहन में स्थायी घर बना लेती हैं, ये फिल्म भी उनमें से एक थी...शानदार .... बधाई अनुराग, शुक्रिया सबद....


a good attempt, i can say. photography achhi hai, dialogues achhe hai but i guess voice thori aur expressive honi chahiye. keep it up.... long way to go.


अनु कोहली

फ़िल्म के परिचय मेँ निर्मल वर्मा का ज़िक्र फ़िल्म देखकर समझ आता है...वही उदास ठहराव जो मन पर कब जम जाता है पता भी नहीँ चलता।
एक एक दृश्य, संगीत और शब्द गुँथे हुए समानान्तर चले जाते हैँ।आवाज़ अपना पूरा प्रभाव डालती है। अगर ये साहित्य को सिनेमा से जोड़ने की कोशिश है तो बेहद खूबसूरत और प्रशंसनीय है।


Very intense and a fabulous movie.


सचमुच … एक सुनसान रचती कविता


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संपादन : अनुराग वत्स.

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