सबद
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व्योमेश शुक्ल की नई कविता





शुरूआत की शुरूआत या अंत के अंत में


्यास
को लगती है बहुत तेज़ प्यास
भूख कई बार भूखी रह जाती है
नींद को नींद अगर आ गयी तो सपने सपना देखने लगते हैं
झूठ झूठ बोलता है कि वह सच है
सच बोलता है सच कि सच है उसका नाम
ग़लती से हो जाती है ग़लती प्यार को प्यार हो जाता है
सुन्दरता हो जाती है सुंदर चिड़िया चिड़िया हो जाती है आधी रात तक चहकती है - रात की सुबह से रात की रात तक
रात की दोपहर में बंदर तुलसी के पत्ते खाकर अपनी खांसी ठीक कर लेता है
इंतज़ार करता है देर तक इंतज़ार लहरें लहरों की तरह लहराती हुई आती हैं
हवा हवा सी पेड़ पेड़ सा फूल फूल सा

एक
होता है यौवन का बचपन - बुज़ुर्ग यौवन से सीखता हुआ
सीखने की तरह सीखना है छपाक छपाक की तरह
बात बात से बात करती है बात बात से बात करता है
सुबह की सुबह के बाद सुबह की दोपहर के बाद सुबह की शाम शाम की दोपहर

शाम
की शाम सितारों के सितारे और चाँद का चाँद
तुम्हारा आना तुम्हारे आने का इंतज़ार तुम्हारे आने की आहट
तुम्हारे आने की हवा तुम्हारे आने के समाज की राजनीति के आरम्भ के अंत से शुरू होने वाली बात का हल्का सा पुरानापन

यह
जीवन-विन्यास हो भी सकता है
*****


{ व्योमेश शुक्ल की अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। कविता के साथ दी गई तस्वीर आना आडेन, स्वीडिश फोटोग्राफ़र की। }

11 comments:

शब्दों और उनके अर्थों में उलझा जीवन।


व्योमेशजी की कविताओं में (मेरी पढ़ी हुई) में संभवतः सबसे अधिक पठनीय .... कविता का यह तेवर कुछ दूसरे कवियों के आस-पास का है, पर प्रीतिकर है । सबसे अधिक पठनीय, इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि इस कविता के साथ यह अनुभव ओढ़ना नहीं पड़ता कि हम कविता के इलाके में है, व्योमेश की सशक्तता और संभावनाओं को बेहतर तरीके से दिखाती हुई यह कविता हमारे भरोसे को अधिक मजबूत करती है ।


gazab ki kavita , vyomesh ke pas jivant bhasha hai , shabdo se khelne jadugari hai unke pas . झूठ झूठ बोलता है कि वह सच है
सच बोलता है सच कि सच है उसका नाम. jivan ke sach ko badi sachchayi ke sath dekhne koshish hai.n ye panktiya.n . vyomesh ko badhayi


Another wonderful marvel from a genius after a long. He has rare quality that Indian writers generally miss-imagination. Secondly, he 'breaths'-in every way- in his language which is important quality a poet needs. A poet who expands boundaries, enriches language is a true poet.


Vyomeshji ke SABD or SABAD ki duniya bahut anokhi hai...


pyar aksar galti se yani bina soche samjhe hi hota hai aur galti bhi anayas hi hoti hai.alag rang ki kavita jismein shabdon ka bhookh kai bar bhookhi rah jati hai.


प्रथमदृष्टया खिलंदड़े प्रतीत होते वाक्य-विन्यास की आभासी परत के पार अपनी तमाम सूक्ष्मताओं में ऊभ-चूभ होता एक अनुपम जीवन-विन्यास है इस कविता में . सूक्ष्म से सूक्ष्मतर होता. जीवन की और जीवन में प्रेम की प्रकृति को बारीकी से पकड़ती कविता . व्योमेश में प्रेक्षण और प्रस्तुति की एक अद्भुत सूक्ष्मता है.

एक स्तर पर यह कविता स्वाभाविकता के बचाव और रचाव का गीत भी है. सभी चीज़ें अपने गुणधर्म और प्रकृति/स्वभाव के अनुसार ही काम कर रही हैं.बिना किसी जाहिर फतवेबाजी के यह कविता प्रच्छन्न रूप से जीवन में स्वाभाविकता को बचाने की भी कविता है. ऐसी स्वाभाविकता जिसमें प्यार को प्यार होता है और सच सच बोलता है.......


भूख कई बार भूखी रह जाती है
नींद को नींद अगर आ गयी तो सपने सपना देखने लगते हैं
झूठ झूठ बोलता है कि वह सच है
सच बोलता है सच कि सच है उसका नाम

समय की नब्ज पर उंगली रखती एक बेहतरीन कविता... बधाई व्योंमेश... अनुराग आपका आभार..


व्योमेश जी की कविता लुभाती है अपने कलेवर में. उनकी कविताओं में प्रयोग बहुत हैं यह नई पीढ़ी की कविता है. बस एक निवेदन है कि जो चीज़ संकेत मात्र से दिखाई जा सकती हो उसे हाथ में लेकर दिखने से वे बचें तो बहुत अच्छा है. अपनी अलग पहचान को बनाए रखने के लिए उन्हें कोई मुश्किल नहीं है. उनकी भाषा यह कम बखूबी कर रही है. नए तेवर पसंद आए अब भी यही कहूँगी.


yeh kavita sachhi aur pavitra hain..kuch cheezein acche buree ke vinyas se bahar hoti hain,sabdon ki shalinta aur prakat karne ka bhav hona kya zyada mahatavapoorna nahi,yeh facebook par lihi jane wali danik aalochna nahi,balki din bhar mein ek nootan /naveen jaisa hai


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सबद का प्रकाशन 18 मई 2008 को शुरू हुआ.

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